Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 64.18

परि॑ णो याह्यस्म॒युर्विश्वा॒ वसू॒न्योज॑सा । पा॒हि न॒ः शर्म॑ वी॒रव॑त् ॥१८॥

पूरा अध्याय