Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 56.1

परि॒ सोम॑ ऋ॒तं बृ॒हदा॒शुः प॒वित्रे॑ अर्षति । वि॒घ्नन्रक्षां॑सि देव॒युः ॥१॥

पूरा अध्याय