Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 54.4

परि॑ णो दे॒ववी॑तये॒ वाजाँ॑ अर्षसि॒ गोम॑तः । पु॒ना॒न इ॑न्दविन्द्र॒युः ॥४॥

पूरा अध्याय