ग्रंथऋग्वेदमण्डल 9सूक्त 5454.2ऋग्वेद 54.2अ॒यं सूर्य॑ इवोप॒दृग॒यं सरां॑सि धावति । स॒प्त प्र॒वत॒ आ दिव॑म् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय