ग्रंथऋग्वेदमण्डल 9सूक्त 55.7ऋग्वेद 5.7उ॒भा दे॒वा नृ॒चक्ष॑सा॒ होता॑रा॒ दैव्या॑ हुवे । पव॑मान॒ इन्द्रो॒ वृषा॑ ॥७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय