Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 40.1

पु॒ना॒नो अ॑क्रमीद॒भि विश्वा॒ मृधो॒ विच॑र्षणिः । शु॒म्भन्ति॒ विप्रं॑ धी॒तिभि॑ः ॥१॥

पूरा अध्याय