Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 34.5

अ॒भीमृ॒तस्य॑ वि॒ष्टपं॑ दुह॒ते पृश्नि॑मातरः । चारु॑ प्रि॒यत॑मं ह॒विः ॥५॥

पूरा अध्याय