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ऋग्वेद 110.7

त्वे सो॑म प्रथ॒मा वृ॒क्तब॑र्हिषो म॒हे वाजा॑य॒ श्रव॑से॒ धियं॑ दधुः । स त्वं नो॑ वीर वी॒र्या॑य चोदय ॥७॥

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