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ऋग्वेद 107.25

पव॑माना असृक्षत प॒वित्र॒मति॒ धार॑या ।
म॒रुत्व॑न्तो मत्स॒रा इ॑न्द्रि॒या हया॑ मे॒धाम॒भि प्रयां॑सि च ॥२५॥

पूरा अध्याय