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ऋग्वेद 107.23

पव॑स्व॒ वाज॑सातये॒ऽभि विश्वा॑नि॒ काव्या॑ ।
त्वं स॑मु॒द्रं प्र॑थ॒मो वि धा॑रयो दे॒वेभ्य॑ः सोम मत्स॒रः ॥२३॥

पूरा अध्याय