ग्रंथऋग्वेदमण्डल 9सूक्त 106106.5ऋग्वेद 106.5इन्द्रा॑य॒ वृष॑णं॒ मदं॒ पव॑स्व वि॒श्वद॑र्शतः । स॒हस्र॑यामा पथि॒कृद्वि॑चक्ष॒णः ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय