Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 103.2

परि॒ वारा॑ण्य॒व्यया॒ गोभि॑रञ्जा॒नो अ॑र्षति । त्री ष॒धस्था॑ पुना॒नः कृ॑णुते॒ हरि॑ः ॥२॥

पूरा अध्याय