Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 101.14

आ जा॒मिरत्के॑ अव्यत भु॒जे न पु॒त्र ओ॒ण्यो॑ः । सर॑ज्जा॒रो न योष॑णां व॒रो न योनि॑मा॒सद॑म् ॥१४॥

पूरा अध्याय