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ऋग्वेद 100.4

परि॑ ते जि॒ग्युषो॑ यथा॒ धारा॑ सु॒तस्य॑ धावति । रंह॑माणा॒ व्य१व्ययं॒ वारं॑ वा॒जीव॑ सान॒सिः ॥४॥

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