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ऋग्वेद 96.5

आ यद्वज्रं॑ बा॒ह्वोरि॑न्द्र॒ धत्से॑ मद॒च्युत॒मह॑ये॒ हन्त॒वा उ॑ ।
प्र पर्व॑ता॒ अन॑वन्त॒ प्र गाव॒ः प्र ब्र॒ह्माणो॑ अभि॒नक्ष॑न्त॒ इन्द्र॑म् ॥५॥

पूरा अध्याय