ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 9393.19ऋग्वेद 93.19कया॒ त्वं न॑ ऊ॒त्याऽभि प्र म॑न्दसे वृषन् । कया॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥१९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय