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ऋग्वेद 89.4

अ॒भि प्र भ॑र धृष॒ता धृ॑षन्मन॒ः श्रव॑श्चित्ते असद्बृ॒हत् । अर्ष॒न्त्वापो॒ जव॑सा॒ वि मा॒तरो॒ हनो॑ वृ॒त्रं जया॒ स्व॑ः ॥४॥

पूरा अध्याय