ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 8484.3ऋग्वेद 84.3त्वं य॑विष्ठ दा॒शुषो॒ नॄँः पा॑हि शृणु॒धी गिर॑ः । रक्षा॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय