Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 81.1

आ तू न॑ इन्द्र क्षु॒मन्तं॑ चि॒त्रं ग्रा॒भं सं गृ॑भाय । म॒हा॒ह॒स्ती दक्षि॑णेन ॥१॥

पूरा अध्याय