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ऋग्वेद 80.10

अवी॑वृधद्वो अमृता॒ अम॑न्दीदेक॒द्यूर्दे॑वा उ॒त याश्च॑ देवीः ।
तस्मा॑ उ॒ राध॑ः कृणुत प्रश॒स्तं प्रा॒तर्म॒क्षू धि॒याव॑सुर्जगम्यात् ॥१०॥

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