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ऋग्वेद 67.12

पू॒र्वीश्चि॒द्धि त्वे तु॑विकूर्मिन्ना॒शसो॒ हव॑न्त इन्द्रो॒तय॑ः । ति॒रश्चि॑द॒र्यः सव॒ना व॑सो गहि॒ शवि॑ष्ठ श्रु॒धि मे॒ हव॑म् ॥१२॥

पूरा अध्याय