Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 65.4

आ त॑ इन्द्र महि॒मानं॒ हर॑यो देव ते॒ मह॑ः । रथे॑ वहन्तु॒ बिभ्र॑तः ॥४॥

पूरा अध्याय