Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 65.2

यद्वा॑ प्र॒स्रव॑णे दि॒वो मा॒दया॑से॒ स्व॑र्णरे । यद्वा॑ समु॒द्रे अन्ध॑सः ॥२॥

पूरा अध्याय