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ऋग्वेद 60.9

पा॒हि नो॑ अग्न॒ एक॑या पा॒ह्यु१त द्वि॒तीय॑या । पा॒हि गी॒र्भिस्ति॒सृभि॑रूर्जां पते पा॒हि च॑त॒सृभि॑र्वसो ॥९॥

पूरा अध्याय