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ऋग्वेद 60.16

स॒प्त होता॑र॒स्तमिदी॑ळते॒ त्वाऽग्ने॑ सु॒त्यज॒मह्र॑यम् । भि॒नत्स्यद्रिं॒ तप॑सा॒ वि शो॒चिषा॒ प्राग्ने॑ तिष्ठ॒ जनाँ॒ अति॑ ॥१६॥

पूरा अध्याय