Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 6.34

अ॒भि कण्वा॑ अनूष॒ताऽऽपो॒ न प्र॒वता॑ य॒तीः । इन्द्रं॒ वन॑न्वती म॒तिः ॥३४॥

पूरा अध्याय