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ऋग्वेद 59.4

घृ॒त॒प्रुष॒ः सौम्या॑ जी॒रदा॑नवः स॒प्त स्वसा॑र॒ः सद॑न ऋ॒तस्य॑ ।
या ह॑ वामिन्द्रावरुणा घृत॒श्चुत॒स्ताभि॑र्धत्तं॒ यज॑मानाय शिक्षतम् ॥४॥

पूरा अध्याय