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ऋग्वेद 49.4

अ॒ने॒हसं॑ प्र॒तर॑णं वि॒वक्ष॑णं॒ मध्व॒ः स्वादि॑ष्ठमीं पिब । आ यथा॑ मन्दसा॒नः कि॒रासि॑ न॒ः प्र क्षु॒द्रेव॒ त्मना॑ धृ॒षत् ॥४॥

पूरा अध्याय