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ऋग्वेद 46.14

अ॒भि वो॑ वी॒रमन्ध॑सो॒ मदे॑षु गाय गि॒रा म॒हा विचे॑तसम् । इन्द्रं॒ नाम॒ श्रुत्यं॑ शा॒किनं॒ वचो॒ यथा॑ ॥१४॥

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