ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 4545.40ऋग्वेद 45.40भि॒न्धि विश्वा॒ अप॒ द्विष॒ः परि॒ बाधो॑ ज॒ही मृध॑ः । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥४०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय