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ऋग्वेद 45.4

आ बु॒न्दं वृ॑त्र॒हा द॑दे जा॒तः पृ॑च्छ॒द्वि मा॒तर॑म् । क उ॒ग्राः के ह॑ शृण्विरे ॥४॥

पूरा अध्याय