ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 4545.20ऋग्वेद 45.20आ त्वा॑ र॒म्भं न जिव्र॑यो रर॒भ्मा श॑वसस्पते । उ॒श्मसि॑ त्वा स॒धस्थ॒ आ ॥२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय