ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 4545.10ऋग्वेद 45.10वृ॒ज्याम॑ ते॒ परि॒ द्विषोऽरं॑ ते शक्र दा॒वने॑ । ग॒मेमेदि॑न्द्र॒ गोम॑तः ॥१०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय