ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 4444.14ऋग्वेद 44.14स नो॑ मित्रमह॒स्त्वमग्ने॑ शु॒क्रेण॑ शो॒चिषा॑ । दे॒वैरा स॑त्सि ब॒र्हिषि॑ ॥१४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय