Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 43.1

इ॒मे विप्र॑स्य वे॒धसो॒ऽग्नेरस्तृ॑तयज्वनः । गिर॒ः स्तोमा॑स ईरते ॥१॥

पूरा अध्याय