ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 44.15ऋग्वेद 4.15प्र पू॒षणं॑ वृणीमहे॒ युज्या॑य पुरू॒वसु॑म् । स श॑क्र शिक्ष पुरुहूत नो धि॒या तुजे॑ रा॒ये वि॑मोचन ॥१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय