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ऋग्वेद 35.23

न॒मो॒वा॒के प्रस्थि॑ते अध्व॒रे न॑रा वि॒वक्ष॑णस्य पी॒तये॑ ।
आ या॑तमश्वि॒ना ग॑तमव॒स्युर्वा॑म॒हं हु॑वे ध॒त्तं रत्ना॑नि दा॒शुषे॑ ॥२३॥

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