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ऋग्वेद 34.3

अत्रा॒ वि ने॒मिरे॑षा॒मुरां॒ न धू॑नुते॒ वृक॑ः । दि॒वो अ॒मुष्य॒ शास॑तो॒ दिवं॑ य॒य दि॑वावसो ॥३॥

पूरा अध्याय