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ऋग्वेद 34.14

आ नो॒ गव्या॒न्यश्व्या॑ स॒हस्रा॑ शूर दर्दृहि । दि॒वो अ॒मुष्य॒ शास॑तो॒ दिवं॑ य॒य दि॑वावसो ॥१४॥

पूरा अध्याय