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ऋग्वेद 33.4

पा॒हि गायान्ध॑सो॒ मद॒ इन्द्रा॑य मेध्यातिथे । यः सम्मि॑श्लो॒ हर्यो॒र्यः सु॒ते सचा॑ व॒ज्री रथो॑ हिर॒ण्यय॑ः ॥४॥

पूरा अध्याय