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ऋग्वेद 33.10

स॒त्यमि॒त्था वृषेद॑सि॒ वृष॑जूति॒र्नोऽवृ॑तः । वृषा॒ ह्यु॑ग्र शृण्वि॒षे प॑रा॒वति॒ वृषो॑ अर्वा॒वति॑ श्रु॒तः ॥१०॥

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