ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 3030.4ऋग्वेद 30.4ये दे॑वास इ॒ह स्थन॒ विश्वे॑ वैश्वान॒रा उ॒त । अ॒स्मभ्यं॒ शर्म॑ स॒प्रथो॒ गवेऽश्वा॑य यच्छत ॥४॥पिछलापूरा अध्याय