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ऋग्वेद 3.17

यु॒क्ष्वा हि वृ॑त्रहन्तम॒ हरी॑ इन्द्र परा॒वत॑ः । अ॒र्वा॒ची॒नो म॑घव॒न्त्सोम॑पीतय उ॒ग्र ऋ॒ष्वेभि॒रा ग॑हि ॥१७॥

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