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ऋग्वेद 3.14

कदु॑ स्तु॒वन्त॑ ऋतयन्त दे॒वत॒ ऋषि॒ः को विप्र॑ ओहते ।
क॒दा हवं॑ मघवन्निन्द्र सुन्व॒तः कदु॑ स्तुव॒त आ ग॑मः ॥१४॥

पूरा अध्याय