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ऋग्वेद 27.5

आ नो॑ अ॒द्य सम॑नसो॒ गन्ता॒ विश्वे॑ स॒जोष॑सः । ऋ॒चा गि॒रा मरु॑तो॒ देव्यदि॑ते॒ सद॑ने॒ पस्त्ये॑ महि ॥५॥

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