ग्रंथऋग्वेदमण्डल 8सूक्त 2323.5ऋग्वेद 23.5उदु॑ तिष्ठ स्वध्वर॒ स्तवा॑नो दे॒व्या कृ॒पा । अ॒भि॒ख्या भा॒सा बृ॑ह॒ता शु॑शु॒क्वनि॑ः ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय