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ऋग्वेद 23.14

श्रु॒ष्ट्य॑ग्ने॒ नव॑स्य मे॒ स्तोम॑स्य वीर विश्पते । नि मा॒यिन॒स्तपु॑षा र॒क्षसो॑ दह ॥१४॥

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