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ऋग्वेद 21.12

जये॑म का॒रे पु॑रुहूत का॒रिणो॒ऽभि ति॑ष्ठेम दू॒ढ्य॑ः । नृभि॑र्वृ॒त्रं ह॒न्याम॑ शूशु॒याम॒ चाऽवे॑रिन्द्र॒ प्र णो॒ धिय॑ः ॥१२॥

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