Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 20.22

मर्त॑श्चिद्वो नृतवो रुक्मवक्षस॒ उप॑ भ्रातृ॒त्वमाय॑ति ।
अधि॑ नो गात मरुत॒ः सदा॒ हि व॑ आपि॒त्वमस्ति॒ निध्रु॑वि ॥२२॥

पूरा अध्याय