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ऋग्वेद 18.4

दे॒वेभि॑र्देव्यदि॒तेऽरि॑ष्टभर्म॒न्ना ग॑हि । स्मत्सू॒रिभि॑ः पुरुप्रिये सु॒शर्म॑भिः ॥४॥

पूरा अध्याय